Stanza 11 of 6
शेंदूर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहर को॥
हाथ लिये गुड़लड्डू साईं सुरवर को।
महिमा कहे न जाए लागत हूँ पद को॥१॥
जय जय जी गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता॥धृ॥
अष्ट सिद्धि दासी संकट को बैरी।
विघ्नविनाशन मंगलमूरत अधिकारी॥
कोटि सूरज प्रकाश ऐसी छवि तेरी।
गण्डस्थल मदमस्तक झूले शशिबिहारी॥२॥
जय जय जी गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता॥धृ॥
भाव भगति से कोई शरणागत आवे।
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे॥
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे।
गोसावीनन्दन निशिदिन गुण गावे॥३॥
जय जय जी गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता॥धृ॥
गणपती बाप्पा मोरया
Prayer complete
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