Refrain1 of 9
Refrain
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
Verse 1
जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग दोष जाके निकट न झाँके॥
Verse 2
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
Verse 3
लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥
Verse 4
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥
Verse 5
बाएँ भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
Verse 6
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई॥
Verse 7
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसि बैकुण्ठ परमपद पावै॥
Refrain
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
गणपती बाप्पा मोरया
