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Om Jai Shiv Omkara

ॐ जय शिव ओंकारा

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Text 1
Verse 11 of 12

Verse 1

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 2

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 3

दो भुज चार चतुर्भुज दशभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 4

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 5

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 6

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुःखहारी जगपालन कारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 7

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 8

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा। पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 9

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा। भाँग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 10

जटा में गंगा बहत है, गल मुण्डन माला। शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 11

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

Verse 12

त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवाञ्छित फल पावे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

गणपती बाप्पा मोरया

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