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Durge Durgat Bhari

दुर्गे दुर्घट भारी

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Text 1
Verse 11 of 6

Verse 1

दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी। अनाथ नाथे अम्बे करुणा विस्तारी।

वारी वारी जन्म मरणांते वारी। हारी पडलो आता संकट निवारी॥

Refrain

जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी। सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥

Verse 2

त्रिभुवन-भुवनी पाहता तुज ऐसी नाही। चारी श्रमले परन्तु न बोलवे काही।

साही विवाद करिता पडले प्रवाही। ते तू भक्तालागी पावसि लवलाही॥

Refrain

जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी। सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥

Verse 3

प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासा। क्लेशांपासुनि सोडवि तोडी भवपाशा।

अम्बे तुजवाचून कोण पुरविल आशा। नरहरी तल्लीन झाला पदपंकजलेशा॥

Refrain

जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी। सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥

गणपती बाप्पा मोरया

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